क्या हैं विटामिन्स कई प्रकार, फ़ायदे और उनकी कमी से होने वाले रोग?

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विटामिन्स मनुष्य के खाद्य सम्बन्धी ऐसे सूक्ष्म जरूरतें हैं, जिनके अभाव में मनुष्य का जीवित रह पाना असंभव हो जाता है। इस सूक्ष्म उपादान का अभाव हो जाए तो जीवन – शक्ति तेजी से घटने लगती है तथा शरीर की रोग – प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है। विटामिन को खाद्य – प्राण” भी कहा जाता है। विटामिन्स अनेक प्रकार के होते हैं और ये विभिन्न खद्य पदार्थों तथा अन्य वस्तुओं में पाए जाते हैं। विभिन्न प्रकार के विटामिनों के नाम A , B ,C ,D आदि रखे गए हैं। इनके विषय में नीचे दिया गया है।

1विटामिन ‘ A ‘ –

इस विटामिन के आभाव में रतौंधी, नेत्र – प्रदाह, अतिसार , इन्फ्लुएंजा, खांसी, न्यूमोनिया, मूत्र – पथरी, श्लैष्मिक – झिल्लियों का क्षय, जलोदर, क्षय तथा फेंफड़ों के रोग हो जाते हैं। यह शरीर के रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है तथा शरीर के सभी संस्थानों को सक्रिय बनाये रखता है।

यह विटामिन हरी सब्जी, हरी घास, हरे पत्तों, ताजा फलों, गाजर, बन्दगोभी, टमाटर, दूध, दही, मक्खन, लस्सी, पनीर, अंडे की जर्दी, मछली के तेल तथा अन्य पशुओं की चर्बी में पाया जाता है।

2विटामिन ‘ B ‘ –

यह कई वस्तुओं का सम्मिश्रण है, विटामिन ‘ B ‘ में अलग – अलग 12 वस्तुएं पाई जाती हैं। इस विटामिन के अभाव में भूख न लगना, कब्ज, बेरी – बेरी, हृदय की निर्बलता, मुंह में छाले हो जाना, जीभ तथा मसूड़ों का सूज जाना, त्वचा पर चकत्ते पड़ जाना, आदि लक्षण प्रकट होते हैं। विटामिन बी6 के अभाव में मुंहासे, पेशी दुर्बलता, मिर्गी, गर्भवती स्त्रियों की वमन, आदि लक्षण प्रकट होते हैं।  विटामिन बी12  की कमी से त्वचा का रंग पीला पड़ जाता है।

विटामिन ‘B’  ईख, चना, चावल, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, सेम, अंडे की सफेदी, मछली की चर्बी आदि में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है।

विटामिन ‘B1’  गेंहूं,चावल, मक्का, दाल, टमाटर, मटर, बंदगोभी, ताजा फल, अखरोट, बादाम, पिस्ता, नारियल आदि मेवा एवं दूध, दही, खमीर में बहुतायात में पाया जाता है।

विटामिन ‘B2’  अंडा, मछली,हरी मटर, फली तथा पालक आदि शाकों में बहुतायत में मिलता है। मांस मछली,जिगर, बीमेक्स, तथा अनाजों में भी भरपूर मात्रा में मिलता है।

विटामिन ‘B6’  गेंहूं, चावल, खमीर, तथा हरी शाक – सब्जियों में पाया जाता है।

विटामिन ‘B12’  गेंहूं, चावल, अंडे की जर्दी, आलू, संतरा, मटर आदि में पाया जाता है।

3विटामिन ‘ C ‘ –

इस विटामिन की कमी से स्कर्वी रोग हो जाता है, शरीर की रोग – प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। दांत तथा हड्डी पुष्ट नहीं रह पाते हैं। इसकी कमी से बच्चों में बजन घटने की समस्या, चिड़चिड़ापन, आदि लक्षण प्रकट होते हैं। विटामिन C की कमी से मसूड़ों का फूलना, नाक तथा मुंह से रक्त का आना, त्वचा का शुष्क होना आदि लक्षण प्रकट होते हैं।

विटामिन C की कमी होने पर नींबू, टमाटर, तरबूज, खीरा, सेब, अंकुरित चना, मूली, शलजम, आलू, दही खट्टे फल आदि का सेवन करना चाहिए।

4विटामिन ‘ D ‘ –

इस विटामिन की कमी से बच्चों को ‘रिकेट्स’ तथा स्त्रियों को ओस्टियोमेलासिया ‘ नमक रोग हो जाता है। दांतों में कीड़ा लगना एवं हड्डियों का पतला तथा टेड़ा पड़ जाना आदि लक्षण प्रकट होते हैं। बढ़ते हुए शरीर अर्थात बच्चों को इस विटामिन की अधिक आवश्यकता पड़ती है।

विटामिन ‘ D ‘ की कमी होने पर घी, दूध, मक्खन, अण्डे, पनीर, तथा हेलिबट ‘ मछली के जिगर में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है। सूर्य की धूप में भी  यह विटामिन अधिक मात्रा में मिलता है।

5विटामिन ‘ E ‘ –

इस विटामिन की कमी से गर्भस्थ – शिशु की मृत्यु हो जाती है तथा स्त्रियों को बार – बार गर्भपात होता है। इसलिए इसे गर्भ – रक्षक ‘ विटामिन भी कहा जाता है। इसकी कमी से पुरुष नपुंशक तथा स्त्रियाँ बाँझ हो जाती हैं। यह विटामिन गेंहूं, अंडा, सलाद, केला, नारियल, दूध, माँस, आदि में भरपूर मात्रा में मिलता है।

6विटामिन ‘ K ‘ –

यह विटामिन रक्त – प्रवाह तथा संतुलन ठीक बनाये रखती है तथा पाचन क्रिया को सुधारती है। यह विटामिन रक्त को जमने में सहायता करती है। विटामिन ‘ K ‘ अंडे की जर्दी, घी, दूध, दही, बंदगोभी, टमाटर, पालक, तथा हरी पत्तेदार सब्जियों में अधिक मात्रा में पाया जाता है।

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