भृंगराज ( False Daisy ) के फायदे और नुकसान- हिंदी में

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भृंगराज एक जड़ी – बूटी है, जिसका वैज्ञानिक नाम Eclipta Alba है। भृंगराज का प्रयोग प्राचीन काल से ही आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता है । आयुर्वेद में भृंगराज को ‘केसराज’ के नाम से भी जाना जाता है। भृंगराज को वैसे तो लगभग सारे संसार में पाया जाता है, किन्तु यह भारत, चीन, थाइलैंड एवं ब्राजील में अधिक पाया जाता है। भृंगराज में एंटी – ऑक्सीडेंट्स जैसे – फ्लेवानॉयड और एल्कलॉइड होते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। आयुर्वेद में इसके तेल का प्रयोग बालों के लिए किया जाता है, इसकी पत्तियों को पेस्ट बनाकर प्रयोग किया जाता है।

भृंगराज के फायदे

भृंगराज का प्रयोग बालों, लिवर तथा पेट की बीमारियों में भी किया जाता है। इसमें उपस्थित पोषक तत्व शरीर के अन्य रोगों को दूर करने में मदद करते हैं। इसका नियमित रूप से सेवन करने से प्रतिरक्षा प्रणाली भी मजबूत होती है। इसका उपयोग त्वचा के रोगों जैसे घाव, जलन तथा चोट में भी आराम देता है।

  1पीलिया के रोग में भृंगराज का उपयोग

भृंगराज में उपस्थित एंटी – बैक्टीरियल और एंटी – इंफ्लेमेटरी गन पीलिया के रोग को दूर करने में मदद करते हैं। भृंगराज के चूर्ण को 1-2 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार लेने से पीलिया के रोग में जल्दी आराम मिलता है।

  2त्वचा के संक्रमण में भृंगराज के फायदे

त्वचा के कटने, छिलने तथा जलने में इसकी पत्तियों का पेस्ट बनाकर त्वचा पर लगाने से जल्दी आराम मिलता है।

  3बबासीर के रोग में भृंगराज के फायदे

भृंगराज बबासीर के दर्द तथा सूजन को कम करने में मदद करता है।

  4इम्युनिटी बढ़ाने में

भृंगराज हमारे शरीर को संक्रमण से बचाने वाली सफ़ेद रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करता है।

  5लिवर को स्वस्थ रखने में भृंगराज का उपयोग

यह शरीर में उपस्थित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है, तथा लिवर को स्वस्थ बनाने में मदद करता है।

  6बालों के लिए उपयोगी

भृंगराज का तेल बालों के लिए वरदान है। यह गिरते बालों की रोकथाम कर उन्हें मजबूत बनाने का काम करता है। भृंगराज के चूर्ण को 1-2 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार सेवन करने से सिर की खुजली, बालों का सफ़ेद होना जैसी अन्य समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

  7अस्थमा के रोग में भृंगराज के फायदे

अस्थमा के रोगी को 1-3 ग्राम भृंगराज का पाउडर बराबर मात्रा में शहद में मिलाकर दिन में तीन बार देने से रोगी को जल्दी आराम मिलता है।

  8मुंह के छालों में उपयोगी

भृंगराज के पत्तों को चबाने से मुँह के छालों में आराम मिलता है।

  9सिर दर्द में उपयोगी

भृंगराज के रस को बराबर मात्रा में दूध में मिलाकर पीने से सिरदर्द में आराम मिलता है।

भृंगराज के नुकसान

भृंगराज एक आयुर्वेदिक जड़ी – बूटी है, वैसे तो इसका कोई हानिकारक प्रयोग नहीं है। लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से कुछ परेशानियाँ हो सकती हैं।

  • भृंगराज का अधिक सेवन अपच तथा पेट की समस्या को बढ़ा सकता है।
  • गर्भवती महिलाओं तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • मधुमेह के रोगियों को इसका सेवन डॉक्टरी परामर्श से ही करना चाहिए।
  • किसी भी प्रकार की एलर्जी होने पर इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।
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