जानिए क्या हैं मालकांगनी के फायदे?

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मालकांगनी की बेल पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक पायी जाती है। इसके पत्ते नुकीले होते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम सिलीस्ट्रस पेनिकुलेटा (Celastrus Paniculatus) होता है। तथा अंग्रेजी में इसे “Staff Tree” के नाम से जाना जाता है। यह गर्म प्रकृति का होता है, यह स्वाद में कड़वा तथा तीक्ष्ण होता है।

मालकांगनी के फायदे

मालकांगनी का प्रयोग विभिन्न प्रकार के चर्म रोगों,पक्षघात, बेरी -बेरी तथा अन्य रोगों में किया जाता है। वैज्ञानिक मतानुसार इसके बीजों में 30%तेल गाढ़ा, लाल -पीला रंग मिश्रित होता है। इसमें सिलेस्ट्रीन व् पेनीकुलेटीन नामक एल्केलाइड्स पाए जाते हैं। यह विटामिन B1 की कमी से होने वाले बेरी – बेरी रोग के लिए उत्तम औषधी है।

  • सफ़ेद दाग में मालकांगनी का प्रयोग

मालकांगनी के तेल का प्रयोग सफ़ेद दागों में लाभकारी होता है। मालकांगनी के तेल में बराबर मात्रा में बाबची के तेल को मिलाकर सफ़ेद दागों पर नियमित रूप से सुबह – शाम लगाने पर सफ़ेद दाग जल्दी ठीक होते हैं।

  • दादखाज में मालकांगनी का उपयोग

मालकांगनी को कालीमिर्च के साथ बारीक पीसकर दाद पर लगाने से दाद में आराम मिलता है।

  • याददाश्त बढ़ाने में

मालकांगनी के तेल का प्रयोग याददाश्त बढ़ाने में भी किया जाता है। याददाश्त बढ़ाने के लिए मालकांगनी के तेल की 2-3 बून्द गोघृत में मिलाकर लेने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।

  • गठिया (Arthritis) के रोग में

गठिया के रोग में मालकांगनी के बीज का प्रयोग किया जाता है। 20 ग्राम मालकांगनी के बीज को 10 ग्राम अजवाइन के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बनालें। सुबह -शाम १ ग्राम चूर्ण का सेवन करने से गठिया के रोग से निजात मिलती है।

  • नाखूनों के रोग में

मालकांगनी के बीजों को पीसकर पेस्ट बना लें, इस पेस्ट का नाखूनों पर लेप करने से नाखूनों के जख्म ठीक हो जाते हैं।

  • माइग्रेन के दर्द में

मालकांगनी के तेल का प्रयोग माइग्रेन के दर्द में और पुराने सिर के दर्द में किया जाता है। मालकांगनी के तेल और बादाम के तेल की 2-2 बून्द बतासे में डालकर सुबह – शाम खाली पेट 1 कप दूध के साथ लेने से माइग्रेन के दर्द में आराम मिलता है।

  • बेरीबेरी रोग में (Thiamine Deficiency)

शरीर में विटामिन बी1 की कमी होने से माँसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं,और पाचन तंत्र खराब हो जाता है। मालकांगनी के तेल की २ बून्द बतासे में डालकर नियमित रूप से सुबह – शाम खाली पेट लेने से इस रोग में आराम मिलता है।

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