फोड़े-फुन्सी का होम्योपैथिक इलाज- Homeopathic Treatment of Abscess

0
6

शरीर में किसी विशेष स्थान पर, एक घेरे के भीतर, चमड़ी के नीचे मवाद उत्पन्न हो जाने को फोड़ा (Abscess) कहते है। यह मांसपेशी के भीतर, शरीर अथवा हड्डी के ऊपरी भाग आदि में भी दिखाई देता है।

यह चोट अथवा सर्दी लगने के कारण भी उत्पन्न हो सकता है तथा कभी-कभी अस्थि-प्रदाह के बाद भी दिखाई देता है। फोड़ा निकलने से पूर्व ज्वर जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। फिर उस स्थान पर जलन – दर्द, लाली एवं गर्मी के लक्षण प्रकट हो जाते हैं। किन्तु कुछ फोड़े ऐसे होते हैं, जिनमें मवाद नहीं होता।

  • Belladona 30 –

यदि किसी रोगी को ज्वर – सूजन तथा तपकन के लक्षण हों, परन्तु फोड़े में मवाद न पड़ा हो, तब इस औषधी को दें। अधिक दर्द, साधारण सूजन, लाली तथा गरम होने के लक्षणों में इस औषधी को  1x शक्ति में देना चाहिए। इस औषधी को दिन में तीन बार दें।

  • Aconite Nap 30 –

फोड़े में मवाद पड़ने से पूर्व ही इस औषधी को देने से लाभ होता है। इस औषधी की 10-10 बून्द 1/4 कप पानी में दिन में तीन बार दें।

  • Merc Sol 30 –

फोड़े की पहली तथा दूसरी अवस्था में, इस औषधी को फोड़े को पकाने के लिए दिया जाता है, ताकि उसमें मवाद पड़ जाये। इस औषधी की 10-10 बून्द 1/4 कप पानी में दिन में तीन बार दें।

  • Heper Sulph 200 –

फोड़े को फोड़ने और उसमे चीरा लगाने जैसा काम करती है । यदि फोड़े में मवाद पड़ गया है तो उसे सुखाने में भी उपयोगी है। इसकी 15 से 20 बूँद चौथाई कप पानी में दिन में तीन बार ले ।

  • Silecea 30 –

फोड़े को भरने के लिए दिया जाता है यह फोड़े के मवाद को निकाल कर फोड़े को सूखा देती है। यदि फोड़े में से पतला पीला पीव सा निकल रहा हो तो ऐसी स्थिति में यह बहुत उपयपगी है । इसकी 15 -15 बूँद चौथाई कप पानी में दिन में तीन बार ले।

  • Calendula Q

यह सभी प्रकार के फोड़े को सही करने के लिए उपयोगी है इसकी 15 – 15 बूँद चौथाई कप पानी में दिन में तीन बार ले। इस दवा की कुछ बूंदें कॉटन पर लेकर सीधे फोड़े पर लगा सकते है तब यह दवा जल्दी असर दिखाती है ।

Facebook Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here