मंजिष्ठा (Rubia Cordifolia) के फायदे और नुकसान

0
45

मंजिष्ठा का प्रयोग आयुर्वेदिक जड़ी – बूटी के रूप में किया जाता  है। इसका वैज्ञानिक नाम रुबिया कार्डिफोलिया (Rubia Cordifolia) है। भारत के पहाड़ी इलाकों में इसकी खेती भी की जाती है। यह रक्त में मौजूद विष की उपस्थिति को हटाने में सहायक होता है। इसका पौधा एक बेल के रूप में होता है।

मंजिष्ठा के फायदे

आयुर्वेद में इसका प्रयोग रक्तशोधक के रूप में किया जाता है। इसकी तासीर गर्म होती है। यह शरीर में बिगड़े हुए पित्त को संतुलित करने में सहायक होता है। मंजिष्ठा में कसैले, थर्मोजेनिक गुण पाए जाते हैं।

  • चेहरे के दागधब्बे मिटाने में

मंजिष्ठा का प्रयोग चेहरे के दाग – धब्बे मिटाने के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। मंजिष्ठा रुट पाउडर का काढ़ा बनाकर पीने से दागों का रंग हल्का होने लगता है।

  • सूजन में उपयोगी

सूजन होने पर इसका प्रयोग एक औषधी के रूप में किया जाता है। सूजन वाली जगह पर मंजिष्ठा और मुलेठी का बराबर मात्रा में लेप लगाने से सूजन कम हो जाती है।

  • गठिया के रोग में

मंजिष्ठा का तेल गठिया के रोग में लाभकारी होता है। इसके तेल की मालिश करने से गठिया के दर्द में आराम मिलता है। हड्डियों के कमजोर होने पर आर्गेनिक मंजिष्ठा पाउडर को शहद के साथ सेवन करने से जल्दी आराम मिलता है।

  • त्वचा के रोगों में

मंजिष्ठा एक रक्तशोधक औषधी है। इसलिए इसका प्रयोग त्वचा सम्बन्धी रोगों को दूर करने में किया जाता है। यह सोरायसिस तथा दाद जैसी त्वचा सम्बन्धी अन्य परेशानियों से निजात दिलाता है।

  • प्रजनन क्षमता बढ़ाने में

मंजिष्ठा में आयुर्वेदिक घटक उपस्थित होते हैं, जिसे फलासरपी कहा जाता है। यह पुरुष प्रजनन क्षमता और महिला बाँझपन को दूर करने में बहुत उपयोगी औषधी है। इसका नियमित सेवन करने से प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है।

  • पथरी के इलाज में

मंजिष्ठा का उपयोग मूत्र सम्बन्धी विकारों को दूर करने में किया जाता है। मंजिष्ठा अग्न्याशय, प्लीहा, यकृत तथा गुर्दे को साफ़ तथा नियंत्रित करने में मदद करता है।

मंजिष्ठा से होने वाले नुकसान

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी से कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन अधिक मात्रा में किसी भी औषधी का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इसलिए किसी भी औषधी को लेने से पूर्व डॉक्टरी परामर्श अवश्य लें।

  1. मंजिष्ठा में बारफारिन और कोमामिन नामक पदार्थ उपस्थित होते हैं। जो रक्त को पतला कर सकते हैं।
  2. इसकी सेवन से मूत्र का रंग नारंगी हो सकता है।
  3. इसका अधिक मात्रा में सेवन कब्ज की परेशानी पैदा कर सकता है।
  4. गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

“मंजिष्ठा के पाउडर को 1-2 ग्राम की मात्रा में और इसके काढ़े को 20-30 मिली लीटर की मात्रा में लेना चाहिए। इससे अधिक मात्रा में इनका सेवन स्वस्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।”

Facebook Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here