गुर्दे (किडनी) के संक्रमण के लक्षण, कारण व होम्योपैथिक दवायें- Kidney Infection Cause, Symptoms & Homeopathic Medicines

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गुर्दे का संक्रमण (Kidney Infection) मूत्राशय से शुरू होकर गुर्दे तक पहुंचता है। गुर्दे के संक्रमण का यदि ठीक तरह से इलाज नहीं किया जाए, तो यह गुर्दे को स्थाई रूप से हानि पहुंचा सकता है। अंग्रेजी दबाओं के सेवन से इसमें आराम तो मिलता है, लेकिन यह परेशानी जड़ से ख़त्म नहीं होती है। और ज़रा सा बीमार होनी पर यह संक्रमण दौबारा से फैलने लगता है। लेकिन होम्योपैथिक दबाओं के सेवन से इस संक्रमण को जड़ से ख़त्म किया जाए सकता है। यदि समय पर इसका इलाज ना किया जाए, तो यह संक्रमण  किड्नी को ख़राब कर देता है।

गुर्दे के संक्रमण के लक्षण- Symptomes Kidney Infection

गुर्दे (किडनी) का संक्रमण होने पर पेशाब के दौरान जलन तथा दर्द का होना इसका प्रारंभिक लक्षण है।

  1. बुखार का आना
  2. बार-बार पेशाब जाना
  3. पेट दर्द होना
  4. धुंधला मूत्र त्याग करना
  5. पेशाब करने के दौरान दर्द या जलन का होना

गुर्दे के संक्रमण के कारण- Cause of Kidney Infection

जब मूत्राशय की नली में बैक्टीरिया प्रवेश करते हैं, और गुर्दे तक पहुंचते हैं। तब इस स्थिति में गुर्दे में संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है। गर्भवती महिलाओं में इसका ख़तरा अधिक बना रहता है।

गुर्दे के संक्रमण की होम्योपैथिक दवायें- Homeopathic Medicins for Kidney Infection

होम्योपैथिक दवाओं के नियमित सेवन से गुर्दे के संक्रमण को ठीक किया जा सकता है। इसकी दबाओं का सेवन लक्षणों के आधार पर ही करें, जो नीचे दिए गए हैं।

1- Apis Mell 30

यदि रोगी को जलन युक्त मूत्र, त्वचा पर दाने, चेहरे पर पीलापन और सूजन तथा हाथ और पैरों में पीड़ा होती है। तो इस औषधी की 10-10 बूंद 1/4 कप पानी में दिन में तीन बार (सुबह, दोपहर, शाम) दें।

2- Arsenic Alb 30

यदि रोगी को थोड़े -थोड़े समय अंतराल पर थोड़ी -थोड़ी मात्रा में ठन्डे पानी के लिए प्यास लगे, बेचैनी तथा व्याकुलता हो या नलिकीय वृक्कशोथ (Tabualar  Nephritis) मूत्र में एल्बुमिन तथा अन्य चीजें होती हैं। तो इस औषधी की 10 -10 बून्द 1/4 कप पानी में दिन में तीन बार लें।

3- Canthris 30

वृक्क का प्रदाह। मूत्र जलन के साथ बूंदों में निष्कासित होता है। मूत्र रक्तिम हो सकता है तो इस औषधी की 10-10 बून्द 1 /4 कप पानी में दिन में तीन बार लें।

4- Ferrum met 30

भोजन का वमन अथवा अपाचित भोजन के साथ मल, पीला, सूजा हुआ चेहरा होने पर इस औषधी की 10 -10 बून्द 1/4 कप पानी में दिन में तीन बार लें।

5- Ferrum Phos 30

रोगी को ज्वर, सिरदर्द, मूत्र त्याग करने की निरन्तर इच्छा बने रहने पर इस औषधी की 10-10 बून्द 1 /4 कप पानी में दिन में तीन बार दें।

6- Marcurius Cor . 30

गर्भवती स्त्री में वृक्क के प्रदाह तथा मूत्र में एल्बुमिन के लिए इस औषधी की 10-10 बून्द 1/4 कप पानी में दिन में तीन बार दें।

7- Vesikeriya Q –

वृक्कशूल, मूत्र निर्माण में वृक्क की असमर्थता तथा इसके कारण शोथ में उपयोगी होने पर इस औषधी की 15-15 बून्द 1/4 कप पानी में दिन में तीन बार दें।

8- Alserum 7x (Serum Angulae)

वृक्क क्षय, हेमोग्लोबिनूरिअ, रक्तमेह, मूत्र का लम्बे समय के लिए शमन, एल्बुमिन युक्त मूत्र, यह वृक्क सम्बन्धी अवरोध को समाप्त कर देती है तथा मूत्र प्रवाह सामान्य कर देती है। इसकी 20 – 20 बून्द दिन में दो बार दे।

9- Zinzerber Off 1x

यह तब सहायता करती है जब वृक्क कार्य करना पूर्णतया बंद कर देते है।

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