गर्भावस्था के नौ महीने- जानिए शरीर में होने वाले बदलाव “क्या करें, क्या नहीं”

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हर महिला के लिए गर्भधारण करना एक सुखद अनुभव होता है। यदि कोई महिला पहली बार गर्भधारण  करती है। तो उसके मन में बहुत सी शंकाएं पैदा होती हैं। गर्भधारण के समय गर्भवती महिलाओं में बहुत से शारीरिक परिवर्तन आते है। वह समझ  नहीं पाती हैं  के आगे क्या होगा और आगे का अनुभव कैसा रहेगा। लेकिन हम आपको आज गर्भावस्था के विभिन्न चरणों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। ताकि होने बाले माता -पिता को इस प्रक्रिया के बारे में सही और सटीक जानकारी प्राप्त  हो सके।

गर्भावस्था का पहला महीना

गर्भावस्था के प्रथम माह में जब गर्भवती स्त्री को मासिक धर्म नहीं आता है। तब  गर्भवती को गर्भधारण के लक्षण दिखते हैं  जैसे -जी मचलाना, चक्कर आना ,भोजन के लिए मन न करना ,या कुछ अलग सा खाने के लिए मन करना।गर्भावस्था के प्रथम माह में शिशु एक भ्रूण के समान होता है।

२. गर्भावस्था का दूसरा महीना

गर्भावस्था के दूसरे महीने में गर्भवती महिला को मां बनने का एहसास होने लगता है। क्यूकि धीरे -धीरे भ्रूण ब्लास्टोसिस्ट से जाइगोट में बदलता है। और मां के शरीर में भी बदलाब आना शुरू हो जाते हैं।इस महीने में बच्चे का विकास शुरू हो जाता है। उसका दिल धड़कने लगता है ,मस्तिष्क विकसित होता है। हाथ और पैरों का विकास भी धीरे -धीरे शुरू हो जाता है।

गर्भावस्था का तीसरा महीना

इस महीने में बच्चा 2 -4  इंच तक लम्बा हो जाता है।और  मां के पेट में हिलना -डुलना भी शुरू कर देता है। जिससे गर्भवती महिला को मां बनने की सुखद अनुभूति भी होती है। गर्भस्था के तीसरे महीने में गर्भ  में पल रहे शिशु के अंगों का सबसे अधिक विकास होता है। इस महीने में शिशु के दिल का विकास भी होता है।

गर्भावस्था का चौथा महीना

गर्भावस्था के चौथे महीने में गर्भवती महिलाओं को उल्टी और मचलन की परेशानी बंद हो जाती है।इस महीने में शिशु के पलकें, नाख़ून ,उंगलियां ,मूत्र प्रणाली का गठन होता है।गर्भावस्था के चौथे महीने में बजन बढ़ने के साथ -साथ कमर और कूल्हे फैलने लगते हैं।तथा पेट और जांघों पर स्ट्रेच मार्क्स होने लगते हैं।

गर्भावस्था का पांचवां महीना

पांचवे महीने के अंत तक बच्चा 8 -10 इंच तक लम्बा हो जाता है। और इसका बजन लगभग 400 -450  ग्राम तक हो जाता है। गर्भावस्था के पांचवे महीने में बच्चा किक मारने लगता है। वो नियमित रूप से सोने और जागने की क्रिया भी करता है। अगर गर्भ  में पल रहा बच्चा लड़का है तो इस महीने में उसके अंडकोष भी विकसित हो जाते हैं।

गर्भावस्था का छठा महीना

गर्भावस्था के छठे महीने में बच्चे के त्वचा पारदर्शी नहीं रहती है। उसपर स्किन आ जाती है। छठवें महीने में गर्भवती महिलाओं का बजन बढ़ने के कारण पैरों और टखनों पर सूजन भी आ जाती है। इस महीने में गर्भवती महिलाओं के पेट पर खिचाव बढ़ने लगता है।

गर्भावस्था का सातवां महीना

सातवे महीने में महिलाओं को अधिक देखभाल की जरुरत होती है।क्यूंकि की बार अधिक परेशानियों के बजह से सातवे महीने में प्री -मैच्योर डिलीवरी भी हो जाती है। सातवें महीने में बच्चा ऑंखें खोलना और बंद करना भी शुरू कर देता है।

गर्भावस्था का आठवां महीना

आठवें महीने में बच्चे के फेंफड़े और मस्तिष्क का विकास हो जाता है। बच्चे के शरीर पर चर्बी चढ़ने लगती है। आठवां महीना गर्भावस्था का अंतिम चरण होता है।

9. गर्भावस्था का नौवां महीना

नौवें महीने में शिशु की हड्डियां कठोर हो जाती हैं। लेकिन उसका मस्तिष्क अभी भी वृद्धि करता है। गर्भवती महिलाओं का गर्भावस्था के शुरू से अंत तक 11 -16  kg बजन बढ़ जाता है।

नोट –गर्भवती महिलाओं  को अपने खाने में पौष्टिक  आहार लेना चाहिए। ये शिशु और मां दोनों के लिए ही उत्तम होता है।

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