InHouseRemedies Blog: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को भावपूर्ण श्रद्धांजली

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अटल बिहारी जी

२५ दिसंबर  १९२४ (जन्म)   –   १६ अगस्त  २०१८ (स्वर्गवास)

  • कार्य – लेखक, राजनेता, कवि
  • पद – भारत के पूर्व प्रधानमंत्री
  • सम्मान  –  भारतरत्न (2015) और पद्म विभूषण (1992)

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के निधन से एक युग का अंत हो गया, वाजपेयी जी करीब 50 वर्षों तक भारतीय संसद के सदस्य रहे। जवाहरलाल नेहरू जी के बाद अटल जी ही एक मात्रा ऐसे नेता थे, जिन्होंने तीसरी बार प्रधानमंत्री होने का गौरव प्राप्त किया। लम्बे समय से बीमार चल रहे 93 वर्षीय वाजपेयी जी नई दिल्ली के एम्स हॉस्पीटल में भर्ती थे।  अटल जी का निधन गुरूवार शाम पांच बजकर पांच मिनट पर हुआ।

भारतरत्न से सम्मानित वाजपेयी जी की प्रारम्भिक शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया ( लक्ष्मीबाई ) कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज से हुए थी।

भारतीय जनता पार्टी

1951 में वो भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे, हालांकि लखनऊ में एक लोकसभा उप चुनाव में अटल जी हार गए थे। 1957 में अटल जी बलरामपुर से चुनाव जीतकर दूसरी लोकसभा में पहुंचे। अटलबिहारी जी 10 बार लोकसभा के लिए चुने गए, वो दूसरी लोकसभा से चौदहवीं लोकसभा तक संसद के सदस्य रहे।

1984 में वे ग्वालियर के माधवराज सिंधिया के हाथों पराजित हो गए थे। 16 मई 1996 को अटलबिहारी वाजपेयी जी पहली बार प्रधान मंत्री बने, लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।  1998 में आम चुनावों में सहयोगी पार्टियों के साथ उन्होंने लोकसभा में अपने गठबंधन का बहुमत सिद्ध किया, और वे एक बार फिर से प्रधानमंत्री बने। बतौर प्रधानमंत्री उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में 1998 में परमाणु बम का परीक्षण, पोखरन -2 शामिल हैं।

13 नम्बर से ख़ास लगाव

  • पहली बार

1996 में जब वह प्रधानमंत्री बने तो उनकी सरकार 13 दिन ही चल पाई थी। 1996 में 13 मई को ही उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।

  • दूसरी बार

1998 में वह प्रधानमंत्री बने और सरकार 13 महीने चली। ठीक 13 महीने बाद फिर सत्ता में लौटे और 13 दलों के साथ मिलकर सरकार बनायी।

  • तीसरी बार

13 अक्टूबर 1999 को शपथ ली और पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। पोखरण परमाणु परीक्षण भी 11 और 13 मई को ही कराया गया था। हालांकि 2004 के चुनाव में यह नम्बर अशुभ रहा। उन्होंने 13 अप्रैल को नामांकन किया था, 13 मई को वोटों की गिनती में उन्हें सत्ता गवानी पडी

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