अमलतास का पौधा: फल और फूल के आयुर्वेदिक उपचार में फायदे: Ayurvedic Benefits of Cassia fistula Tree Flower & Fruit

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अमलतास का पेड़ अधिकतर हिमालय के मैदानी भागों में पाया जाता है। इसे बहुत से लोग अपने बागीचे में भी लगाते हैं। अमलतास के पेड़ पर पीले रंग के सुन्दर  फूल लगते हैं। आयुर्वेद में अमलतास का विशेष महत्व है।अमलतास की फली जब कच्ची होती है तो इसका रंग हरा होता है। लेकिन जब यह पक जाती है तो इसका रंग गहरा भूरा हो जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Cassia fistula (कैसिया फिस्टुला) है। यह स्वाद में मीठा होता है। इसकी फली का प्रयोग पेट के दर्द में भी किया जाता है।

अमलतास की छाल में टेनिन पाया जाता है। इसके पत्ते और फूलों में ग्लायोकोसाइड की भरपूर मात्रा पायी जाती है। अमलतास की छाल को चमड़ा रंगने के काम में भी प्रयोग करते हैं।और इसकी छाल से रस्सियां भी बनाई जाती हैं। अमलतास का आयुर्वेद में विशेष महत्व है।

आयुर्वेद में अमलतास के उपयोग

अमलतास को आयुर्वेद में जड़ी -बूटी के रूप में प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद में अमलतास के फूल, पत्ते, फल, जड़, तथा छाल सभी को प्रयोग में लाया जाता है।

1. बुखार (Fever)

यदि किसी व्यक्ति को आमपाचन होकर बुखार है, तो अमलतास की जड़ की छाल का काढ़ा पीने से बुखार जल्दी ठीक होता है।

2. बच्चों के पेट दर्द में (Stomach Pain)

यदि बच्चों के पेट में दर्द हो तो अमलतास की फली के गूदे की घुट्टी बनाकर बच्चों को देने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

3मुंह के छालों में (Mouth Ulcer)

अमलतास के बीज को पीसकर इसमें थोड़ा सा कत्था मिलाकर छालों पर लेप करने से छाले जल्दी ठीक होते हैं।

4त्वचा के रोग में (Skin Diseases)

अमलतास के पत्तों को पीसकर त्वचा के चकते तथा खुजली पर लगाने से जल्दी आराम मिलता है।

5. कब्ज होने पर (Constipation)

अमलतास के गूदे तथा मुनक्के को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से कब्ज ठीक हो जाती है।

6. अस्थमा (Asthma)

अस्थमा के रोग में यह बहुत ही लाभकारी होता है। अमलतास की फली का 2 ग्राम गूदा निकालकर पानी में घोलकर गुनगुना करके पीने से जमा हुआ कफ निकल जाता है।

7. प्रसव में (Childbirth)

यदि प्रसव में अधिक कष्ट हो तो अमलतास की फली का 10 ग्राम गूदा निकालकर पानी में उबाल लें। और उसमें थोड़ी सी शक्कर मिलाकर पीने से जल्दी आराम मिलता है।

8. घाव भरने में (Wound healing)

अमलतास एक एंटीबायोटिक का काम करता है। इसलिए इसकी छाल को घिसकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी ठीक होता है।

नोट – अमलतास के पुष्प और गूदे का प्रयोग 5-10 ग्राम ही करना चाहिए। अन्यथा यह पेट में मरोड़ और दर्द पैदा कर देता है।

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