टॉन्सिल (Tonsils): क्या है लक्षण, कारण, परहेज और होम्योपैथिक इलाज?

0
198

टॉन्सिल्स की बीमारी गले की बीमारी है। जिसके कारण गले में सूजन और दर्द की परेशानी बनी रहती है। टॉन्सिल्स के कारण खाने-पीने में परेशानी होती है, थूँक निगलने में भी दर्द होता है। टॉन्सिल्स बढ़ने के साथ – साथ इसका दर्द भी बढ़ता जाता है। टॉन्सिल्स होने का मुख्य कारण शरीर में आयोडीन की कमी का होना है। यह परेशानी गले में गाँठों के रूप में होती है। टॉन्सिल्स के बढ़ने पर अधिकतर डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते है। लेकिन होम्योपैथिक दवाओं से इसे जड़ से ख़त्म किया जा सकता है। होम्योपैथिक दवाओं का प्रयोग टॉन्सिल्स के लक्षणों के आधार पर ही करें।

टॉन्सिल्स के कारण (Cause of Tonsils)

टॉन्सिल्स होने का मुख्य कारण गले में संक्रमण का होना है। यदि सही समय पर इसका इलाज हो तो यह परेशानी ठीक हो जाती है। बदलते मौसम में टॉन्सिल्स की परेशानी अधिक होती है।

  1. जुखाम के कारण
  2. ठंडी और गर्म चीजों को एक साथ खाने के कारण
  3. बदलते मौसम के कारण
  4. पाचन तंत्र सही न होने के कारण

टॉन्सिल होने के लक्षण (Symptomes of Tonsils)

टॉन्सिल्स होने पर गले में दर्द, सर्दी, जुखाम जैसी परेशानियां होती हैं। इसके कुछ अन्य कारण इस प्रकार हैं।

  1. गले में सूजन और दर्द का होना
  2. गले में खराश बने रहना
  3. कान और गले के निचले हिस्से में दर्द का होना
  4. टॉन्सिल्स के कारण बुखार का आना

टॉन्सिल्स की होम्योपैथिक दवाएं (Homeopathy Medicines)

यह एक ऐसी बीमारी है, जिसका इलाज सही समय पर हो जाए तो यह ठीक हो जाती है। अन्यथा यह एक गंभीर बीमारी का कारण भी बन सकती है।

  • Ammonium Mur 30

कंठ व् टॉन्सिल की आंतरिक व् बाहरी सूजन, कठिनाई पूर्वक निगलना तथा चिपचिपा बलगम होने पर इस औषधी की १०-१० बून्द १/४ कप पानी में दिन में तीन बार ( सुबह, दोपहर, शाम ) लें।

  • Baryta Carb 3x

टॉन्सिल बढ़े तथा सूजे हुए, मुख से श्वास लेना तथा निगलना कष्टपूर्ण होने पर इस औषधी की २-२ गोलियां दिन में तीन बार दें।

  • Belladona 30

रोगी के कंठ में जलन, टॉन्सिल्स बड़े हुए तथा लाल होने पर इस औषधी को प्राथमिक चिकित्सा के रूप में देना चाहिए। इसकी १०-१० बून्द १/४ कप पानी में दिन में तीन बार दें।

  • Calcerea Carb 1m

टॉन्सिल्स के लिए यह औषधी रामबाण का काम करती है। टॉन्सिल होने पर इस औषधी को महीने में सिर्फ एक बार ही दें जब तक टॉन्सिल्स ख़त्म ना हों।

  • Calcerea Sulph 30

टॉन्सिल पर फोड़ा होने पर इस औषधी की १०-१० बून्द 1/4 कप पानी में दिन में तीन बार दें।

  • Heper Sulph 30

प्रदाहित टॉन्सिल में मवाद पड़ने का खतरा होने पर, कंठ में कांटे की अनुभूति तथा टॉन्सिल पर व्रण का उपचार इस औषधी से हो जाता है। इस औषधी की १०-१० बून्द दिन में तीन बार लें।

  • Merc Iod 3x

टॉन्सिल्स के लिए यह उत्तम औषधी है। दायीं ओर के टॉन्सिल में अधिक दर्द होने पर इस औषधी की 2-2 टेबलेट दिन में तीन बार लें।

  • Nitricum Acid 30

जब वास्तव में रोगी कुछ भी नहीं निगल पाता है। तब इस औषधी की 10-10 बून्द 1/4 कप पानी में दिन में तीन बार दें।

  • Tuberculinum 200

बार-बार टॉन्सिल होने के साथ सूखी खांसी हो तथा बजन कम होने लगे तब इस औषधी को दें।

टॉन्सिल्स के परहेज (Tonsils Abstinence)

टॉन्सिल होने पर खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ठंडी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

  1. ठंडी चीजों का सेवन न करें।
  2. तला, भुना तथा मसालेदार भोजन नहीं करना चाहिए।
  3. शराब, धूम्रपान का सेवन नहीं करना चाहिए।
  4. सर्दी, जुखाम के संक्रमण युक्त व्यक्ति से दूरी बनाके रहें।
Facebook Comments