त्यौहार 2018: क्या है नागपंचमी की पूजन विधि और व्रत कथा?

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श्रावण मास की शुक्ल पक्ष पंचमी को नागपंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। इस वर्ष नागपंचमी का त्यौहार १५ अगस्त दिन बुधबार को मनाया जाएगा। यह त्यौहार देश के अलग -अलग हिस्सों में बहुत ही धूम – धाम से मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। नागपंचमी के दिन नागों को दूध पिलाने की भी परम्परा है।

नागपंचमी का व्रत और पूजन विधि

नागपंचमी के दिन माताऐं और बहनें सारा दिन व्रत रखती है, और नाग देवता की पूजा करती हैं। नाग देवता की पूजा के लिए सबसे पहले लकड़ी की चौकी पर नाग देवता की मूर्ती या चित्र स्थापित करके, उन्हें रोली और अक्षत से टीका लगाएं, और फूल चढ़ाए| नागपंचमी के दिन नागों को कच्चे दूध में घी और चीनी मिलाकर अर्पण करें। नाग देवता की घूप, दीप जलाकर पूजा करें और कथा सुने। इस दिन साँपों के दर्शन करना तथा सपेरे को दान देना भी शुभ माना जाता है।

नागपंचमी की व्रतकथा

एक राजा के सात पुत्र थे, उन सभी का विवाह हो चुका था। उनमे से छः पुत्रों को संतान प्राप्त हो गई थी। परन्तु राजा के सातवें पुत्र को संतान का सुख प्राप्त नहीं हुआ था। इस वजह से राजा की छोटी बहू बहुत दुःखी रहती थी। संतान न होने के कारण समाज उन्हें ताने देता था। एक दिन श्रावण मास की पंचमी तिथि को रात के समय राजा की छोटी बहू ने सपने में साँप देखे। उनमे से एक साँप ने कहा की पुत्री तुम क्यों दुःखी रहती हो, तुम हमारी पूजा अर्चना करो। तुम्हारे घर संतान का जन्म अवश्य होगा। प्रातः काल होने पर राजा की छोटी बहू ने यह स्वप्न अपने पति को सुनाया, तो उसने कहा की जैसे तुमने स्वप्न में पूजा देखी है वैसे ही करो। राजा की छोटी बहू ने पूरे विधि -विधान के साथ व्रत रखकर नाग देवता की पूजा अर्चना की और कुछ समय बाद उसके घर भी संतान का जन्म हुआ।

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