बवासीर (पाइल्स) के कारण, परहेज़, आयुर्वेदिक एवं घरेलू इलाज़- Hemorrhoids (Piles), Abstinence, Ayurvedic and Homeopathic Treatment

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बवासीर एक ऐसी परेसानी है जिसमे रोगी ना ठीक से बैठ सकता है और नहीं चल  सकता है। बवासीर दो प्रकार के होते है अंदरूनी बवासीर और बाहरी बवासीर। बवासीर में रोगी को मॉल त्यागने में परेशानी होते है जिसमे कभी -कभी खून भी निकलने लगता है। और मस्सों में सूजन भी आ जाती है।जिसकेकारण रोगी को बैठने में परेशानी होती है। बाहरी बवासीर में मस्से गुदा के बहार की तरफ निकले रहते हैं। और अंदरूनी बवासीर में मस्से अंदर की तरफ ही रहते हैं। बाहरी बवासीर को ऑपरेशन के द्वारा सही किया जा सकता है पर अंदरूनी बवासीर को नही किया जा सकता है।

बवासीर होने के कारण-

गुदा के अंदर और आस -पास बढ़ता हुआ दबाब ही अधिकतर बवासीर का मुख्य कारण  होता  है।

  1. कब्ज के कारण गुदा पर अधिक दबाब पड़ने से भी बवासीर होता है।
  2. गर्भावस्था  के  दौरान भी बवासीर की समस्या होती  है।
  3. बवासीर अधिक बजन  बढ़ने से भी हो सकता है।

क्या खाएं?

बवासीर होने पर फाइबर युक्त भोजन करें जो आसानी से पच सके ओट्स, मक्का, अंजीर, पपीता और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें। प्याज, अदरक, लहसुन, करेला भी बवासीर के लिए बहुत फायदे मंद है। मल त्यागने में परेसानी ना हो इसलिए तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

क्या ना खाएं?

बवासीर होने पर चटपटा, तीखा, मसालेदार खाना नहीं खाना चाहिए तथा मेदा, दूध और तेल जैसे खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। क्यूंकि ये कब्ज बनाते हैं।

बवासीर एक ऐसी परेशानी है जिससे छुटकारा पाया जा सकता है। इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए परहेज़ बहुत जरूरी होता है। परहेज करने से और आयुर्वेदिक उपचार से इस बीमारी को जड़ से ख़त्म किया जा सकता है।

बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज़-

अंग्रेजी दबाइयों से इस बीमारी को पूरी  तरह ठीक नहीं किया  जा सकता पर आयुर्वेदिक उपचार से दोनों प्रकार के इस बीमारी को जड़ से ख़त्म किया ज सकता है।

  • अंजीर से (FIG)

रात को सोने से पहले दो सूखे हुए अंजीर पानी में भिगोकर रख दें और सुबह खाली पेट खाएं अंजीर खाने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद में कुछ भी नही खाना चाहिए २-३ महीने तक लगातार ऐसा करने से दोनों प्रकार के बवासीर जड़ से ख़त्म हो जाते हैं।

  • दिव्य अर्शकल्प वटी

बवासीर होने पर पतंजली  की दिव्य अर्शकल्प वटी लेने से आराम मिलता है यह दवा इस बीमारी को जड़ से ख़त्म कर देती है।

  • नारियल की जटा से (Coconut Jute)

नारियल की जटा (Coconut Coir) को जला कर भस्म बना लें और ३ ग्राम नारियल की जटा की भस्म  को दही या छाछ के साथ दिन में २-३ बार लेने से इस बीमारी जड़ से ख़त्म हो जाता है पर यह उपाय सिर्फ एक दिन ही करना है।

  • जिमीकंद से (Elephant Foot Yam)

जिमीकंद इस बीमारी के लिए बहुत ही अच्छी जड़ी -बूटी है।इससे पाचन क्रिया मजबूत होती है। 5 ग्राम जिमीकंद पाउडर को दही या छाछ के साथ सुबह खालीपेट  लेने  से बवासीर जड़ से ख़त्म हो जाता है। २-३ महीने तक यह प्रक्रिया लगातार करें।

  • बेल का शरबत (Wood Apple Juice)

बेल बहुत ही अच्छा आयुर्वेदिक उपाय है इसमें टेनिन अधिक मात्रा में होता है। यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और मस्सों की सूजन को कम करता है

एक गिलास बेल का रस रोज पीने से बवासीर से जल्दी छुटकारा मिलता है।

घरेलू नुस्खों से इलाज़-

बाहरी बवासीर को तो ऑपेरशन से भी निकाल सकते हैं पर अंदरूनी बवासीर को नहीं| अंदरूनी बवासीर को घरेलु इलाज़ से सही किया  जा सकता है।

  1. खूनी बवासीर होने पर सुबह -सुबह खाली पेट दही या छाछ पीने से आराम मिलता है।
  2. बवासीर होने पर कच्ची मूली खाने से भी आराम मिलता है।
  3. रोज सुबह कच्चा लहसुन खाने से बवासीर के दर्द में आराम मिलता है और सूजन भी ख़त्म होती है।
  4. पपीता खाने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है।
  5. ४ -५ बड़ी इलायची तवे पर भून लें और पीस कर चूर्ण बना लें। रोज सुबह खाली पेट इस चूर्ण को लेने से बवासीर ख़त्म हो जाता है।
  6. अरंडी के तेल को गर्म कर लें और इसमें कपूर मिला लें। मस्सों को साफ़ करके किसी कपडे से पोंछ कर सुखा लें  और अरंडी के तेल से मालिश करें दिन में ३-४ बार ऐसा करने से सूजन में आराम मिलता है।
  7. सेंहुड़ के दूध में थोड़ी से हल्दी मिलकर मस्से पर लगाने से मस्से ठीक हो जाते है।
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